बुधवार, 11 सितंबर 2013

एक सवाल

चालीस-आठ  लाशों  के  ऊँचे  ढेर पर |
कुछ तो बोलो ,इस प्रायोजित अंधेर पर ||
भाजपा, सपा, बसपा  सारे  हैं  मौन   |
है  धुला  दूध  का  बोलो  इनमें  कौन ||
सेंके  सबने  इस  दावानल  में  हाथ  |
है  दिया  आततायी  लोगों  का साथ ||
सबने मिल  रौंदी  भाईचारे की छाती |
कर डाली तहस-नहस गंगा-जमुनी थाती ||
इन घड़ियाली आंसूओं का अब क्या मानी|
पहले की  आगजनी ,फिर डाल रहे पानी  ||
लोगों  का   नेताओं  पर   नहीं भरोसा है  |
सब ने दंगों के लिए इन्हीं  को कोसा है ||
ये क्या पीड़ित लोगों को न्याय दिलाएंगे |
आधी  सहायता तो ये  ही  खा  जायेंगे ||

          श्रीश राकेश जैन |

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